
आज दिनांक 22 नवंबर 2025 को सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी ने ऐसा मानवीय उदाहरण पेश किया, जिसने पूरे गिरिडीह को प्रेरित कर दिया। कॉलेज में आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप में छात्रों और छात्राओं में जो उत्साह और उमंग दिखाई दी, उसने पूरे माहौल को ऊर्जा से भर दिया।
कैंप के आयोजकों ने बताया कि कल कुल 50 छात्रों का टेस्ट किया गया था, जिनमें से 32 छात्र/छात्राएँ ब्लड देने योग्य पाए गए, जबकि कुछ का वजन कम और कुछ में हीमोग्लोबिन की कमी होने के कारण उन्हें शामिल नहीं किया जा सका।
🔥 इन 32 में से 28 छात्र-छात्राएँ पहली बार रक्तदान कर रहे थे!

यह पल उनके लिए भी भावुक और यादगार रहा।

कैंप का आयोजन रेड क्रॉस सोसाइटी गिरिडीह द्वारा किया गया। इस सफल आयोजन में प्रमुख योगदान अध्यक्ष अरविंद जी का रहा, वहीं सदस्य चरणजीत सिंह भी पूरे समय मौके पर उपस्थित रहे। रेड क्रॉस के डॉक्टरों और कंपाउंडरों ने मेहनत और समर्पण से कैंप को सफल बनाया।
सुभाष इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ. विजय सिंह शुरू से अंत तक कैंप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा—
“हम हर 6 महीने पर अपने कॉलेज में ब्लड डोनेशन कैंप लगाएंगे। पहली बार रक्तदान करने वाले युवा समाज के नए वृक्ष हैं—जो आगे चलकर बड़ी संख्या में दूसरों की जान बचाएंगे।”
कॉलेज के फैकल्टी मेंबर्स ने भी छात्रों को मोटिवेट करने में अहम भूमिका निभाई।
प्राचार्य विपिन चौधरी पिछले एक सप्ताह से छात्रों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे थे। चूंकि ज्यादातर छात्रों ने पहली बार रक्तदान किया, इसलिए थोड़ी घबराहट दिखी, लेकिन जोश और जुनून उससे कई गुना ज्यादा था।

डॉक्टरों ने बताया कि रक्तदान के लिए न्यूनतम 45 किलो वजन और पर्याप्त हीमोग्लोबिन जरूरी होता है। इन मानकों को पूरा न कर पाने के कारण कई युवा रक्तदान से वंचित रह गए, लेकिन उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।
आज का दिन कॉलेज और पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन गया।
यह कैंप सिर्फ कार्यक्रम नहीं—बल्कि मानवता का महापर्व बना।




