
जी जोहार नमस्कार! मैं जगन्नाथ और आप देख रहे हैं — बिहार-झारखंड सीमा क्षेत्र स्थित बैंगाबाद प्रखंड का महुआटांड़ गांव,
जहां आज भी ग्रामीण “आजादी के बाद भी गुलामी जैसी जिंदगी” जीने को मजबूर हैं।
🚫 21वीं सदी में भी सड़क नहीं!

हैरानी की बात है कि इस आधुनिक युग में भी महुआटांड़ गांव तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं बनी है।
बरसात हो या गर्मी — इस गांव के लोगों को हर दिन कीचड़, गड्ढों और टूटी पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है।
📢 “थक चुके हैं मांग करते-करते”

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मुखिया, प्रमुख, विधायक और सांसद — सभी से बार-बार सड़क निर्माण की मांग की,
लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
थककर ग्रामीणों ने खुद अपने हाथों से श्रमदान कर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया है।
हालांकि यह निर्माण स्थायी नहीं होगा, लेकिन लोगों की जिद और जज़्बा साफ झलकता है —
“सरकार न बनाए तो हम खुद बना लेंगे!
🧱 गांव की हालत बदहाल, बच्चों की पढ़ाई और आवागमन प्रभावित

सड़क न होने से गांव में स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
गांव के लोग कहते हैं —
“हम विकास के नाम पर सिर्फ वादे सुनते आए हैं, सड़क नहीं देखी।”
🎙️ BNB ALL INDIA NEWS की रिपोर्ट
BNB का मकसद हंगामा खड़ा करना नहीं, बल्कि समाधान करवाना है।
हमारी टीम ने मौके पर जाकर ग्रामीणों, निवर्तमान प्रमुख, जिला परिषद प्रतिनिधि और सांसद प्रतिनिधि (भाजपा नेता रामप्रसाद यादव) से बात की।
सभी ने एक ही आवाज़ में कहा —
“सड़क निर्माण अब सिर्फ मांग नहीं, हमारी जरूरत है।”




